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Weather बारिश ने किया बेहाल

छत्तीसगढ़ और मध्यदेश में लगातार बारिश से लोग बेहाल है। पिछले कई घंटों से हो रही बारिश से नदी-नाले उफान पर है। कई गांवों का शहरों से संपर्क टूट गया है। जिसके कारण लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है। वहीं प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद है। बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू भी जारी है।


बारिश ने बढ़ाई जलप्रपातों की खूबसूरती


वहीं बस्तर में दो दिनों से हो रही भारी बारिश ने जलप्रपातों की खूबसूरती और भी बढ़ा दी है। बस्तर के तीरथगढ़ की खूबसूरती भी अपने चरम पर है। लगभग 300 फीट ऊंचाई से गिरता तीरथगढ़ का जलप्रपात पर बारिश के चलते और भी मनोरम दृश्य बन रहा है।


इसके अलावा इन जलप्रपातों की खूबसूरती को देखने और कैमरे में कैद करने के लिए भारी संख्या में पर्यटक यहां आ रहे हैं, लेकिन यहां किसी तरह के सुरक्षा इंतजाम और दिशा निर्देश नहीं होने के चलते ये सैलानी अपनी जान जोखिम में डालकर सेल्फी ले रहे हैं। जो गंभीर हादसों को दावत देने जैसा है। इन जलप्रपातों पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

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बुधवार का दिन विधानसभा से लेकर संसद तक किसानों के नाम रहा। किसानों के मुद्दे पर विधानसभा, राज्यसभा औऱ लोकसभा में तीखी बहस हुई। मंदसौर गोलीकांड के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से किसानों पर चर्चा सरगर्म रही। विधानसभा में किसानों के मुद्दे पर दो दिन लगातार चर्चा हुई। इस स्थगन प्रस्ताव के जरिए कांग्रेस ने कर्ज माफ करने, फसलों का लाभकारी मूल्य देने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग की। कांग्रेस ने गोलीकांड पर सवाल भी पूछे। कांग्रेस के तीखे हमले के बाद सरकार ने खुद को किसानों का हितैषी बताने के साथ ही कांग्रेस पर आंदोलन को भड़काने के आरोप लगाए। 


किसान आंदोलन और किसानों की खुदकुशी को लेकर संसद में भी कांग्रेस ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। राज्यसभा में जहां दिग्विजय सिंह ने किसानों की बात रखी तो लोकसभा में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंदसौर गोलीकांड का मुद्दा उठाया।


किसान कितना संवेदनशील विषय है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीजेपी की सरकार यूपी और महाराष्ट्र में कर्ज माफी का ऐलान कर चुकी है। वहीं कांग्रेस ने पंजाब और कर्नाटक में किसानों के लोन माफ किए हैं। मध्य प्रदेश की सरकार जहां किसानों के लिए लगातार फैसले ले रही है तो कांग्रेस दावा कर रही है कि अगर वो सत्ता में आती है, तो कर्ज माफ करेगी। इन सबके बीच बड़ा सवाल है। अन्नदाता कहीं सियासी दांव पेंचों में उलझ कर ना रह जाए।



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